अभी कुछ ही मिनट पहले मुझे जेसन ने यह ख़बर भेजी है । आपका यह लेखक खुश है। 'पीली छतरी वाली लड़की' ..... वह 'लम्बी कहानी' (यह मैंने 'सौजन्यतावश' कहा था, जिसकी आज के 'हिंदी समाज' में कोई उपस्थिति नहीं । वरना यह हिन्दी के किसी सम्पर्कवान लेखक के किसी 'उपन्यास' से कमतर उपन्यास नहीं था, और जिसके चलते जातिवादी-ब्राह्मणवादी 'सत्ता-केन्द्रों' ने जो 'फासीवादी' अभियान चलाया और इसमें पुलिस अफसरों से लेकर उनसे नाभि-नाल बद्ध दरबारी वामपंथी-जातिवादी भी शामिल थे ) के बारे में हिल्दा सईद द्वारा की गयी एक समीक्षा पाकिस्तान के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण अखबार 'डान' के नए अंक में पढिए। 'पीली छतरी वाली लड़की' के दो उर्दू अनुवाद पाकिस्तान में पहले से ही बहुत लोकप्रिय हैं। इनमें से एक अनुवाद उर्दू साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका 'आज'(कराची) के सम्पादक अजमल कमाल और जीनत ने किया है और दूसरा भारत के सुप्रसिद्ध अनुवादक, कानपुर में रहनेवाले और अपने बेहतरीन अनुवादों के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त सैयद हैदर जाफरी ने किया है। इतना ही नहीं, हिन्दी के भ्रष्ट जातिवादी सत्ताकेंद्रों के सतत निशाने पर रहने वाली यह रचना शीघ्र ही जर्मन भाषा में तीन शीर्षस्थ अनुवादकों और विद्वानों द्वारा अनुदित हो कर आगामी विश्व पुस्तक मेला (१४ से १८ अक्टूबर, २००९) फ्रैंकफुर्ट, जर्मनी में रिलीज़ हो रही है। दिलचस्प तथ्य यह कि इसका अनुवाद तीन जर्मन भारतविदों ने मिलकर किया है। ये हैं प्रोफेसर इनेस फोर्नेल, गोटिंगन विश्व विद्यालय, प्रोफ हेंज वेर्नर वेस्लर, बोन विश्व विद्यालय और प्रोफ रेनाल्ड शाइन । इन तीनों अनुवादकों के बारे में विस्तार से मैं ज़ल्द ही बताऊंगा। मानव अधिकारों में रूचि रखने वालों और एक न्याय पूर्ण , आधुनिक, वर्ग-जाति निरपेक्ष सामाजिक व्यवस्था के पक्षधरों के बीच आपके लेखक द्वारा लिखी गयी यह 'प्रेम कथा' बेहद प्रिय है| जर्मनी में इसके प्रकाशक वही हैं जिन्होंने निर्मल वर्मा, अज्ञेय और भीष्म साहनी की रचनाओं के अनुवाद जर्मनी में प्रकाशित किए हैं (द्रौपदी वेर्लाग प्रकाशन) | अमरावती के उन चार दिनों के अनुभवों को पोस्ट करने से पहले इसे आपके साथ आपका यह अपना लेखक 'शेयर' करना चाहता है। लिंक है:
http://www.dawn.com/wps/wcm/connect/Dawn%20Content%20Library/dawn/in-paper-magazine/books-and-authors/a+common+threat
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The department of Indian theatre is ready with its annual production and this time it is history vis-à-vis modern times. The play titled